5 Simple Steps to Stop being An Emotional Fool in Hindi भावनात्मक मूर्ख बनने से रोकने के लिए 5 सरल उपाय

    

5 Simple Steps to Stop being An Emotional Fool In Hindi
5 Simple Steps to Stop being An Emotional Fool In Hindi


 Who is an Emotional Fool ? भावनात्मक मूर्ख कौन है ?

           भावनाएं हर किसी के जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हम सभी अपने जीवन में किसी न किसी बिंदु पर भावुक होते हैं। बहुत अधिक भावुक होना हमें असुरक्षित महसूस करा सकता है। यह हमें चोट पहुँचाकर हमारे सुखी जीवन को खतम भी कर सकता है। जो लोग बहुत अधिक भावुक होते हैं वे काफी संवेदनशील पाए जाते हैं और उन्हें वास्तविकता को स्वीकार करना मुश्किल होता है। यही कारण है कि बहुत अधिक भावुक लोगों को अक्सर "भावनात्मक मूर्ख"/ Emotional Fool कहा जाता है। आज हम यहा खुद को Emotional Fool होने से कैसे रोक सकते है वो देखनेवाले है। 

       Stop Being an Emotional Fool

            भावुक /Emotional लोग हमेशा यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि दूसरे लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। वे हर छोटी-छोटी बात में कुछ न कुछ छिपे अर्थ खोजने की कोशिश करते हैं। हमें खुद अध्ययन करना होगा और हर चीज का संतुलन बनाना होगा। बहुत अधिक भावनाएँ हर संभव प्रकार का नुकसान कर सकती हैं, जैसे कि हमें धोखा भी दिया जा सकता है। 

          जब हमारा भावनात्मक स्वास्थ्य खराब स्थिति में होता है, तो हमारे आत्मसम्मान का स्तर भी बहोत कम हो जाता है। हमारा काम मे मन नहीं लगता है। हम नकारात्मक ज्यादा सोचने लगते है। इसके लिए हमें नकारात्मक सोच को धीमा करना होगा और जो हमें परेशान कर रहा है उससे भी निपटना होगा, ताकि हम खुश रह सके, शांती से रह सके। चलो, हम यहा 5 Simple Steps to Stop being An Emotional Fool In Hindi /भावनात्मक मूर्ख बनने से रोकने के लिए 5 सरल उपाय देखते है। 


5 Simple Steps to Stop being An Emotional Fool In Hindi
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5 Simple Steps to Stop being An Emotional Fool


भावनात्मक मूर्ख बनने से रोकने के लिए 5 सरल उपाय

1. Reject Sadness उदासी को अस्वीकार करें

          बहोत बार ऐसा होता है की हम समय-समय पर खुद को दुखी, निराश एवं हताश पाते है। हैरानी की बात तो देखो, अधिकतर हम नहीं जानते कि हम दुखी या निराश क्यों हैं ? लेकिन हमें हैरानी को दूर करके दुख की हर घड़ी में हमें अपने उदास होने के पीछे का वजह खोजने की कोशिश करनी चाहिए। तभी तो हम उदासी को ''पीछे मूड'' कह सकते है और खुश रह सकते है।  

2. Get Out of Fear  डर से बाहर निकलें

          बहोत बार ऐसा होता है की हम बोलना/ बात करना पसंद करते है और वही 4-5 लोगों के भीतर अपनी राय देने से कतराते है। हम सही राय देंगे या गलत ? इसी सोच मे डर हम पर हावी हो जाता है। मानके चलो, हम किसी INTERVIEW मे जा रहे है। हम तन से तो तैयार है पर मन से नहीं। क्योंकी वहा क्या पूछा जायेगा ? हमारा Selection होगा या नहीं ? इन सवालों का समंदर हमारे अंदर तूफान ले के आता है और हम डर जाते है। इसलिए हमें ज्यादा सोचना नहीं है, कार्य करते रहना है।    

          एक बात हमेशा याद रखिये, समस्या से भागना कभी समाधान नहीं होता इसलिए हमें परिस्थिती कोई भी आये, डटकर मुकाबला करना है। आपने सुना तो होगा ना, डर के आगे जीत है। अगर हम डर के कारण रुक जाते हैं तो पछतावा हमारा साथ जीवनभर देगा। यह पछतावा जल्द ही दुख में बदल जाएगा क्योंकि हम वहां नहीं हैं जहां हम होना चाहते हैं। इसलिए डर से बाहर निकलिए, खुद पर भरोसा कीजिये और आगे बढ़िए।  

3. Control Anger क्रोध पे नियंत्रण रखिये

          कभी कभी हमारे साथ हमारे मन जैसा नहीं होता तब हम क्रोधित हो जाते है। सबसे खतरनाक तो गुस्सा/ क्रोध होता है और जब ये नियंत्रण के बाहर जाता है तो हम हद से ज्यादा प्रतिक्रिया देते है /Over-react करते है। 

          क्रोध को नियंत्रित रखने की ज़रूरत है इसलिए तुरंत प्रतिक्रिया न करने के लिए खुद को प्रशिक्षित करना होगा लेकिन इसके लिए काफी लंबा सफर तय करना होगा। हमें क्रोध क्यों आता है, पहले ये समझना होगा। और बादमे क्रोध पे नियंत्रण कैसे लाया जाये देखना होगा।  

क्रोध नियंत्रण के लिए ये पढ़े - Anger Management

4. Find a Way रास्ता खोजें

           बहोत बार हम खुद से ही हार गए है ऐसा लगता है, जब हमपर नकारात्मकता हावी हो जाती है। इसलिए अपने आपको भावनात्मक केंद्रबिंदु होने से बचाये। बहोत बार सामनेवाला गलतफहमी का शिकार हो जाता है और वो हमें गलत समझने लगता है। लेकिन आपका इरादा नेक है तो घबराएगा नहीं, आगे बढ़ते रहिये। सच का सूरज ज्यादा देर अँधेरे मे नहीं रह सकता।  

          आपको नकारात्मक उत्तेजनाओं का मुकाबला करने के लिए रास्ता खोजने की जरूरत है, जो आपको हराने की धमकी दे रहा है। आप इस अवसर का उपयोग केवल आपको थोड़ी राहत देने के कर सकते है। अपने आपको अच्छा समय दे सकते है। जैसे ही आपकी भावनाएं पर्याप्त रूप से शांत हो जाती हैं तब आप अपने रास्ते पे चल सकते है। 

5. Keep your emotions to your self  अपनी भावनाओं को अपने तक ही सीमित रखें

          वो लोग भावनात्मक मूर्ख होते है जो अपने आसपास के लोगों को अपनी भावनाओं को दिखाते है। ऐसा कुछ लोग समझते है क्योंकी वो कुटील प्रवृत्ती के होते है। हमारा कहना हमारे सामने रो रो के सुनते है और पीठ पीछे वही बात सबको हस हस के बताते है। इसलिए ऐसे लोगों से हमें दूर रहना है और अपनी भावनाओं को अपने तक ही सीमित रखना है। 

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          भावनात्मक मूर्ख होने का मतलब यह नहीं है कि आपको अपने आप को अनावश्यक रूप से पछतावा करने की आवश्यकता है। अपने जीवन को ऐसी जगह जीने का कोई मतलब नहीं है जहां आपकी भावनाओं के प्रभाव से कभी कोई मुक्ति न हो। हमें तो बस्स अपनी भावनाओं को सुनने और उन्हें सही ढंग से समझने की जरूरत है। जो कुछ होना है वो आपके हाथ मे बिलकुल नहीं है लेकिन  आपको [REACT, RESPONSE OR CONTROL] क्या करना है, ये सब आपके हाथ मे है। So be aware & Stop Being an Emotional Fool.


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