Akshay Tritiya अक्षय तृतीया क्यों होती है इतनी ख़ास ?

Akshay Tritiya 2022


Akshay Tritiya 

 
अक्षय तृतीया क्यों होती है इतनी ख़ास ? 


"न माधव समो मासो न कृतेन युगं समम्।

न च वेद समं शास्त्रं न तीर्थ गंगयां समम्।।"


          वैशाख के समान कोई मास नहीं है, सत्ययुग के समान कोई युग नहीं हैं, वेद के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। उसी तरह अक्षय तृतीया के समान कोई तिथि नहीं है।

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          धरती पर देवताओं के 24 रूपों में अवतार लेने के बारे में बताया गया है। इनमें छठा अवतार भगवान परशुराम का था। पुराणों के अनुसार उनका जन्म अक्षय तृतीया तिथि को हुआ था। 

          एक बार परशुराम जी भगवान शिव से मिलने कैलाश पर्वत पर पहुंचे, तो गणेश जी ने उनको रोक लिया। वे उनको मिलने नहीं दे रहे थे। तब उन्होंने ​क्रोधित होकर गणेश जी पर परशु से वार कर दिया, जिससे गणेश जी का एक दन्त टूट गया, इस वजह से गणेशजी एकदंत कहलाए। 

          इतना ही नहीं, भगवान परशुराम शस्त्र विद्या में बहुत ही पारंगत थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण और कर्ण को शस्त्र विद्या दी थी। इन सबकी विद्या के बारे मे हम परिचित है। 

        अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व भी है। मान्यता है कि इसी दिन सतयुग और त्रेता युग का आरंभ हुआ था। द्वापर युग का समापन और महाभारत युद्ध का समापन भी इसी तिथि को हुआ था। इसी शुभ दिन पर भगवान विष्णु के चरणों से धरती पर गंगा अवतरित हुई।

          अक्षय तृतीया बसंत ऋतु के समापन और ग्रीष्म ऋतु के प्रारंभ का भी दिन है इसलिए इस दिन जल से भरे घड़े , पंखे, खड़ाऊं, छाता, खरबूजा, चीनी, चावल, नमक आदि गर्मी में लाभकारी वस्तुओं का दान दिया जाता है। 

> तीर्थस्थल बद्रीनारायण के पट भी अक्षय तृतीया को खुलते हैं। 

> वृंदावन के बांके बिहारी के चरण दर्शन केवल अक्षय तृतीया को होते हैं। 

> वर्ष में साढ़े तीन अक्षय मुहूर्त है, उसमें प्रमुख स्थान अक्षय तृतीया का है।

           चैत्र शुक्ल गुड़ी पड़वा, वैशाख शुक्ल अक्षय तृतीया, आश्विन शुक्ल विजयादशमी तथा दीपावली की पड़वा का आधा दिन। इसीलिए इन्हें वर्ष भर के साढ़े तीन मुहूर्त भी कहा जाता है....।

> अक्षय तृतीया के दिन लोग विशेषतौर पर नया वाहन, गृह प्रवेश करना, सोना खरीदना इत्यादि जैसे कार्य करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यह दिन सभी के जीवन में अच्छा भाग्य और सफलता लेकर आता है। 


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> शादी विवाह, मुंडन संस्कार आप निसंकोच कर सकते हैं। आपको मुहूर्त देखने की ज़रूरत नहीं है। 

> इस दिन लोग जमीन जायदाद संबंधी कार्य, शेयर मार्केट में निवेश, रियल एस्टेट के सौदे या किसी नए बिजनेस की शुरुआत करते हैं। बिना पंचांग देखे इस दिन को श्रेष्ठ मुहुर्तों में शामिल किया जाता है।


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          अब आप बताइये, आपने इस शुभदिन कौनसा काम शुरू किया या फिर क्या खरेदी किया ?

कमेंट बॉक्स मे ज़रूर बताइए। 


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